
रायपुर। राजधानी के भनपुरी क्षेत्र में इन दिनों आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना हुआ है। जय बजरंग बली मानस मंडली के सान्निध्य में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ 12 फरवरी को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ किया गया। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी रही, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय रंग में रंग गया। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।

काशी, उत्तर प्रदेश से पधारे प्रख्यात भागवताचार्य अनिल शास्त्री महाराज बीते कई दिनों से श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर रहे हैं। उन्होंने बाल लीलाओं, गोवर्धन पर्वत धारण, महारास और अन्य पौराणिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।

रुक्मिणी विवाह प्रसंग बना आकर्षण का केंद्र
भागवत सप्ताह के छठे दिन रुखमणी विवाह प्रसंग का विशेष आयोजन किया गया। जैसे ही श्रीकृष्ण और रुखमणी के विवाह की कथा प्रारंभ हुई, पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के नारों के बीच श्रद्धालु भजन-कीर्तन में मग्न होकर झूमते नजर आए। वातावरण पूरी तरह भक्तिरस से ओत-प्रोत हो गया।

विधायक मोतीलाल साहू की उपस्थिति
इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के विधायक मोतीलाल साहू ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कथा का श्रवण कर आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। भागवताचार्य अनिल शास्त्री महाराज ने मंच से अतिथियों का सम्मान भी किया।

कार्यक्रम में पार्षद अंबिका साहू, मंडल अध्यक्ष मनोज जोशी, भाजपा नेता अरविंद सिंह, भाजपा युवा मोर्चा कार्यालय प्रभारी विशाल शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
अपने संबोधन में विधायक मोतीलाल साहू ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में नैतिकता, एकता और सकारात्मक सोच को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना से समाज सशक्त बनता है।

अंतिम दिन होगा हवन और विशाल भंडारा
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि सप्ताह के समापन पर विधिवत हवन, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। क्षेत्रवासियों से अधिकाधिक संख्या में सहभागिता की अपील की गई है।
पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और सामाजिक समरसता की झलक देखने को मिल रही है, जिससे भनपुरी क्षेत्र श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में डूबा हुआ है।